अक्सर हमारे बिज़नेस कोचिंग प्रोग्राम् में सवाल पूछा जाता है कि आपकी सफलता का रहस्य क्या है या आप यहाँ तक कैसे पहुंचे। कुछ लोग पूछते हैं कि एलोन मस्क या वारेन बुफ्फे की सफलता का राज़ क्या है। ऐसा लगता है मानो हर कोई सफलता के पीछे का रहस्य ढूंढ रहा हो। क्या वाकई सफलता पाना मैथ्स या कैमिस्ट्रि के किसी जटिल फॉर्मूला की तरह है या सच्चाई कुछ और है, यह जानने के लिए एक छोटा सा काम कीजिये।
आप एक पेपर और पेन उठाकर 5 ऐसे गुण या खूबियाँ लिखिए जो किसी भी व्यक्ति में सफलता पाने के लिए होना चाहिए। यही कार्य अपने परिवार के अन्य सदस्यों से और मित्रों से भी कराये। अब सबकी सूची को ध्यान से मिलाएँ। यह देख कर आप अचरज में पड़ जाएंगे कि अधिकांश लोगों ने एक ही तरह के उत्तर दिये हैं। इस कार्य को गंभीरता से कीजिएगा क्योंकि बिज़नेस गुरुकुल या वीआईपी की अलग-अलग बैच के सैकड़ों लोगों से हमने सालों से इसका उत्तर पूछकर रिसर्च में पाया है कि लगभग 60 से 80 प्रतिशत खूबियाँ सबकी सूची में एक जैसी रहती है। अधिकांश लोग कड़ी मेहनत, जुनून, प्रतिबद्धिता, टाइम मैनेजमेंट, जवाबदेही, ईमानदारी, भविष्य की सोच, सही संगत और सीखने का जज़्बा जैसे उत्तर लिखते हैं।
सिर्फ भारत ही नहीं, दुबई, नेपाल, मलेशिया, सिंगापुर और फ़्रांस जैसे देशों में अपने प्रतिभागियों से ये प्रश्न किया है और सभी जगह यही उत्तर मिले हैं। इसका अर्थ यह है कि सफलता का कोई गुप्त रहस्य है ही नहीं। दुनिया के हर कोने में सफलता के मूलभूत सिद्धान्त एक जैसे हैं । मैं तो यह भी कहूँगा कि एक खिलाड़ी से लेकर अभिनेता तक, एक वैज्ञानिक से लेकर एक उद्योगपति तक, सभी लोग इन मूल सिद्धांतों का पालन करके ही सफल होते हैं ।
मैं आपसे यह अपील करना चाहता हूँ कि आज से सफलता और समृद्धि का रहस्य तलाश करना बंद कर दीजिये क्योंकि इससे फालतू काम और कुछ नहीं है। सिर्फ 2 सिद्धांतों को अपने मन में पक्का कर लीजिये।
सफलता का पहला सिद्धान्त:
अगर आप उस लक्ष्य का पीछा नहीं करेंगे जो आपको पाना है तो आप कभी उसे हासिल नहीं कर पाएंगे।
यदि आप अपने लक्ष्य के पीछे जुनून के साथ जाएंगे तो हो सकता है असफल हो जाएँ लेकिन इसकी भी बड़ी संभावना है कि सफल हो जाएँ। आपके आसपास ऐसे अनेक लोग होंगे जो असफलता के डर से निर्णय नहीं लेते लेकिन निर्णय ना लेने से असफलता निश्चित है।
यदि निर्णय ले लें तो सफलता की भी संभावना बन जाती है। कुछ न करके असफल होने से कुछ करके असफल हो जाना अच्छा है क्योंकि कम से कम मन में मलाल तो नहीं रहेगा कि लक्ष्य के पीछे जाने प्रयास ही नहीं किया।
तो मैं आपसे फिर कह दूँ कि यदि आप अपने सपनों के पीछे नहीं जा रहे हैं या आप मेहनत नहीं कर रहे हैं या आप असफलता से डर रहे हैं तो आपको वो कभी नहीं मिलेगा जो आपको पाना है। दुनिया में सपने उसी को मिले हैं जो अपने सपनों के पीछे गया है। घर बैठकर किसी ने इतिहास नहीं रचा है। अभी उठिए और डट जाइए, ज्यादा किन्तु परंतु मत कीजिये, बहुत सारे लोगों से सलाह मशवरा मत कीजिये, सीधे एक्शन में आइए और परिणाम दिखने लगेंगे।
सफलता का दूसरा सिद्धान्त:
"ना" से घबराना छोड़ दीजिये तो सफलता निश्चित है। हम अक्सर मदद मांगने से घबराते हैं क्योंकि हमें सामने वाले के मना करने का डर रहता है। हम मार्गदर्शन लेने से घबराते हैं, हम टीम बनाने से घबराते हैं, हम दूसरे से पूछने से घबराते है क्योंकि हमें अपमान या नकारात्मक जवाब का डर होता है।
मैं खरी खरी बात कहता हूँ कि दुनिया में बड़े से बड़े आदमी कि हैसियत "ना" बोलने से ज़्यादा की नहीं होती है। मैं अक्सर मज़ाक में लोगों से कहता हूँ कि यदि किसी दिन मुकेश अंबानी जी आपको मिल गए और आपने उनसे कह दिया एक दिन मैं आपका घर एंटिलिया ख़रीदूँगा तो मुकेश जी ज़्यादा से ज़्यादा हंस देंगे या घूर कर देख लेंगे, और क्या कर सकते हैं।
कुछ कपनियां फ्रेश ग्रेजुएट को जॉब देने के पहले एक उनके सामने दुनिया की कुछ शीर्ष हस्तियों के नाम देती है और एक शर्त रखती है। उनसे कहा जाते है कि किसी भी तरह इन हस्तियों से अगले एक माह में या तो फोन से बात करो, या मिलो या उनसे अपने नाम पर एक ई-मेल मँगवा कर दिखाओ। उस सूची में बड़े नेता, खिलाड़ी, फिल्म स्टार, राजनीतिज्ञ और कलाकार रहते हैं जिन तक पहुँच पाना आम लोगों के लिए लगभग असंभव होता है। यह देखा गया है कि 80 प्रतिशत युवा प्रयास भी नहीं करते और वहाँ जॉब का विचार मन से निकाल देते हैं। 15 प्रतिशत युवा एक या दो बार प्रयास करके हार मान लेते हैं। सिर्फ कुछ लोग ही ऐसे होते हैं जो उन हस्तियों के पीछे पड़ जाते हैं। सैकड़ों फोन करते हैं, हर दिन अनेकों बार भावना भरी मेल भेजते हैं और उस हस्ती के ऑफिस को आखिरकार झुकना पड़ता है। इन छात्रों को तुरंत नौकरी दी जाती है क्योंकि इन लोगों ने "ना" से घबराए बिना डटे रहने का गुण दिखाया।
इस विषय पर उज्ज्वल पाटनी यूट्यूब चैनल पर जब विडियो रिलीस किया गया, तो कुछ ही दिनों में 3 मिलियन से ज्यादा लोगों ने 60 से ज्यादा देशों में देखा। इससे यह समझ आया कि "ना" का डर बहुत से लोगों में हैं। साथियों, कुछ "ना" के बाद "हाँ" का आना निश्चित है, कुछ लोगों से मदद मिलना निश्चित है, कुछ लोगों से मार्गदर्शन मिलना निश्चित है तो फिर डर कैसा। आज के बाद किसी ने "ना" कह दिया तो अपने सपनों को मत मारिए, दरवाज़े खटखटाते रहिए, कुछ आपके लिए ज़रूर खुलेंगे।
और हाँ, सफलता का रहस्य या शॉर्टकट ढूँढना आज ही छोड़ देना।
Million Dollar Advice:
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